बुधवार, 24 दिसंबर 2014

जाड़ा बहुत सतावत बा


जाड़ा बहुत सतावत बा

सरसर हवा बाण की नाईं

थर थर काँपैं बाबू माई

तपनी तापैं लोग लुगाई

कोहिरा छंटत नहीं बा भाई

चहियै सबै जियावत बा

जाड़ा बहुत सतावत बा

गरमी असौं बराइस खीस

जाड़ा भय बा ओसे बीस

जौ ना रोकिहैं अब जगदीस

मरि जइहैं बुढ़ये दस बीस

जियरा बहुत जरावत बा

जाड़ा बहुत सतावत बा

माछी मच्छर भएन अलोप

पहिने बाटै सब कनटोप

बरफ किहे बा अइसन कोप

गाँव भयल सरवा यूरोप

केहु ना देखै आवत बा

जाड़ा बहुत सतावत बा
साभार .

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